नमोनारसिंह विधुतास्मदं ह
अहोपिङ्गलाक्षाग्नि जाज्वल्यमान स्फुरन्नासनिश्वास संहाररम्भ
जटापावकज्वालिकादीप्यमान ॥१॥
महाक्रोधवह्नि छटाविस्फुलिङ्ग नखैर्दंष्ट्रिकाभिः महाघोररूप महागर्जनोग्रध्वनिध्वस्त लोक॥२॥
हिरण्यासुरप्राण नैवेद्यलोल रमादैवत प्रार्थनाक्षेपकोप महाभक्तबालस्तुति प्रियमाण ॥३॥
पूरोमङ्गलाग्रीश मध्योज्ज्वलास्य प्रपन्नार्तिसद्यो विमोक्षप्रदाता पराभक्तिमार्गैक संसेव्यमान ॥४॥
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Tuesday, March 10, 2009
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